وَالْعَصْرِ
नमाज़े अस्र की क़सम
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।
وَالْعَصْرِ
नमाज़े अस्र की क़सम
إِنَّ الْإِنْسَانَ لَفِي خُسْرٍ
बेशक इन्सान घाटे में है
إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَتَوَاصَوْا بِالْحَقِّ وَتَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ
मगर जो लोग ईमान लाए, और अच्छे काम करते रहे और आपस में हक़ का हुक्म और सब्र की वसीयत करते रहे