Decree · al-Qadr · سورة القدر · 5 ayahs

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो रहमान व रहीम है।

إِنَّا أَنْزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ

हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया

وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ

और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है

لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ

शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है

تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ مِنْ كُلِّ أَمْرٍ

इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं

سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ

ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है