नूह़ ने कहा : मेरे पालनहार! मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि मैं तुझसे ऐसी चीज़ का प्रश्न करूँ, जिस (की वास्तविक्ता) का मुझे कोई ज्ञान नहीं और यदि तूने मुझे क्षमा नहीं किया और मुझपर दया नहीं की, तो मैं नुक़सान उठाने वालों में से हो जाऊँगा।
Hud 11:47
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قَالَ رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ ۖ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُنْ مِنَ الْخَاسِرِينَ
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और अगर तु मुझे (मेरे कसूर न बख्श देगा और मुझ पर रहम न खाएगा तो मैं सख्त घाटा उठाने वालों में हो जाऊँगा (जब तूफान जाता रहा तो) हुक्म दिया गया ऐ नूह हमारी तरफ से सलामती और उन बरकतों के साथ कश्ती से उतरो