Hud 11:89

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وَيَا قَوْمِ لَا يَجْرِمَنَّكُمْ شِقَاقِي أَنْ يُصِيبَكُمْ مِثْلُ مَا أَصَابَ قَوْمَ نُوحٍ أَوْ قَوْمَ هُودٍ أَوْ قَوْمَ صَالِحٍ ۚ وَمَا قَوْمُ لُوطٍ مِنْكُمْ بِبَعِيدٍ

القرآن الكريم

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ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम्हें मेरा विरोध इस बात पर न उभारे कि तुमपर वैसी ही यातना आ पड़े, जो नूह़ की जाति, या हूद की जाति, या सालेह़ की जाति पर आई। और लूत की जाति तुमसे कुछ दूर नहीं है।

Azizul Haq Al-Omari

और ऐ मेरी क़ौमे मेरी ज़िद कही तुम से ऐसा जुर्म न करा दे जैसी मुसीबत क़ौम नूह या हूद या सालेह पर नाज़िल हुई थी वैसी ही मुसीबत तुम पर भी आ पड़े और लूत की क़ौम (का ज़माना) तो (कुछ ऐसा) तुमसे दूर नहीं (उन्हीं के इबरत हासिल करो

Farooq Khan and Nadwi