An-Nisa' 4:50

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انْظُرْ كَيْفَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ ۖ وَكَفَىٰ بِهِ إِثْمًا مُبِينًا

القرآن الكريم

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देखो तो सही, वे लोग कैसे अल्लाह पर मिथ्या आरोप लगा रहे हैं! और यह खुला पाप होने के लिए पर्याप्त है।

Azizul Haq Al-Omari

(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो ये लोग ख़ुदा पर कैसे कैसे झूठ तूफ़ान जोड़ते हैं और खुल्लम खुल्ला गुनाह के वास्ते तो यही काफ़ी है

Farooq Khan and Nadwi