Al-Qiyamah 75:2

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وَلَا أُقْسِمُ بِالنَّفْسِ اللَّوَّامَةِ

القرآن الكريم

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तथा मैं क़सम खाता हूँ निंदा करने वाली अंतरात्मा की।

Azizul Haq Al-Omari

(और बुराई से) मलामत करने वाले जी की क़सम खाता हूँ (कि तुम सब दोबारा) ज़रूर ज़िन्दा किए जाओगे

Farooq Khan and Nadwi