هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ الْغَاشِيَةِ
क्या तेरे पास ढाँपने लेने वाली (क़ियामत) की ख़बर पहुँची?
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ الْغَاشِيَةِ
क्या तेरे पास ढाँपने लेने वाली (क़ियामत) की ख़बर पहुँची?
وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ خَاشِعَةٌ
उस दिन कई चेहरे अपमानित होंगे।
عَامِلَةٌ نَاصِبَةٌ
कठिन परिश्रम करने वाले, थक जाने वाले।
تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةً
वे गर्म धधकती आग में प्रवेश करेंगे।
تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ آنِيَةٍ
उन्हें खौलते सोते का जल पिलाया जाएगा।
لَيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِنْ ضَرِيعٍ
उनके लिए कांटेदार झाड़ के सिवा कोई खाना नहीं होगा।
لَا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِي مِنْ جُوعٍ
जो न मोटा करेगा और न भूख मिटाएगा।
وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَاعِمَةٌ
उस दिन कई चेहरे प्रफुल्लित होंगे।
لِسَعْيِهَا رَاضِيَةٌ
अपने प्रयास पर प्रसन्न होंगे।
فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ
ऊँची जन्नत में होंगे।
لَا تَسْمَعُ فِيهَا لَاغِيَةً
उसमें कोई बेकार (अशिष्ट) बात नहीं सुनेंगे।
فِيهَا عَيْنٌ جَارِيَةٌ
उसमें बहने वाले स्रोत (चश्मे) हैं।
فِيهَا سُرُرٌ مَرْفُوعَةٌ
उसमें ऊँचे-ऊँचे तख्त हैं।
وَأَكْوَابٌ مَوْضُوعَةٌ
और (पीने वालों के लिए तैयार) रखे हुए प्याले हैं।
وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ
और क्रम में लगे हुए गाव-तकिए हैं।
وَزَرَابِيُّ مَبْثُوثَةٌ
और बिछाए हुए क़ालीन हैं।
أَفَلَا يَنْظُرُونَ إِلَى الْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
क्या वे ऊँटों को नहीं देखते कि वे कैसे पैदा किए गए हैं?
وَإِلَى السَّمَاءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
और आकाश को (नहीं देखते) कि उसे कैसे ऊँचा किया गया?
وَإِلَى الْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
और पर्वतों को (नहीं देखते) कि कैसे गाड़े गए हैं?
وَإِلَى الْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ
तथा धरती को (नहीं देखते) कि कैसे बिछाई गई है?
فَذَكِّرْ إِنَّمَا أَنْتَ مُذَكِّرٌ
अतः आप नसीहत करें, आप केवल नसीहत करने वाले हैं।
لَسْتَ عَلَيْهِمْ بِمُصَيْطِرٍ
आप उनपर कोई दरोग़ा (नियंत्रक) नहीं हैं।
إِلَّا مَنْ تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ
परंतु जिसने मुँह फेरा और कुफ़्र किया।
فَيُعَذِّبُهُ اللَّهُ الْعَذَابَ الْأَكْبَرَ
तो अल्लाह उसे सबसे बड़ी यातना देगा।
إِنَّ إِلَيْنَا إِيَابَهُمْ
निःसंदेह हमारी ही ओर उनका लौटकर आना है।
ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُمْ
फिर बेशक हमारे ही ज़िम्मे उनका ह़िसाब लेना है।