The Sun · ash-Shams · سورة الشمس · 15 ayahs

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।

وَالشَّمْسِ وَضُحَاهَا

सूरज की क़सम! तथा उसके ऊपर चढ़ने के समय की क़सम!

وَالْقَمَرِ إِذَا تَلَاهَا

तथा चाँद की (क़सम), जब वह सूरज के पीछे आए।

وَالنَّهَارِ إِذَا جَلَّاهَا

और दिन की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को प्रकट कर दे!

وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَاهَا

और रात की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को ढाँप ले।

وَالسَّمَاءِ وَمَا بَنَاهَا

और आकाश की तथा उसके निर्माण की (क़सम)।

وَالْأَرْضِ وَمَا طَحَاهَا

और धरती की तथा उसे बिछाने की (क़सम!)

وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا

और आत्मा की तथा उसके ठीक-ठाक बनाने की (क़सम)।

فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا

फिर उसके दिल में उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी (की समझ) डाल दी।

قَدْ أَفْلَحَ مَنْ زَكَّاهَا

निश्चय वह सफल हो गया, जिसने उसे पवित्र कर लिया।

وَقَدْ خَابَ مَنْ دَسَّاهَا

तथा निश्चय वह विफल हो गया, जिसने उसे (पापों में) दबा दिया।

كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَاهَا

समूद (की जाति) ने अपनी सरकशी के कारण झुठलाया।

إِذِ انْبَعَثَ أَشْقَاهَا

जब उसका सबसे दुष्ट व्यक्ति उठ खड़ा हुआ।

فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ نَاقَةَ اللَّهِ وَسُقْيَاهَا

तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा : अल्लाह की ऊँटनी और उसके पीने की बारी का ध्यान रखो।

فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُمْ بِذَنْبِهِمْ فَسَوَّاهَا

परंतु उन्होंने उसे झुठलाया और उस (ऊँटनी) की कूँचें काट दीं, तो उनके पालनहार ने उनके गुनाह के कारण उन्हें पीस कर विनष्ट कर दिया और उन्हें मटियामेट कर दिया।

وَلَا يَخَافُ عُقْبَاهَا

और वह उसके परिणाम से नहीं डरता।