إِنَّا أَنْزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ
निःसंदेह हमने इस (क़ुरआन) को क़द्र की रात (महिमा वाली रात) में उतारा।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
إِنَّا أَنْزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ
निःसंदेह हमने इस (क़ुरआन) को क़द्र की रात (महिमा वाली रात) में उतारा।
وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ
और आपको क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है?
لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ
क़द्र की रात हज़ार महीनों से उत्तम है।
تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ مِنْ كُلِّ أَمْرٍ
उसमें फ़रिश्ते तथा रूह (जिबरील) अपने पालनहार की अनुमति से हर आदेश के साथ उतरते हैं।
سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ
वह रात फ़ज्र उदय होने तक सर्वथा सलामती (शांति) है।