عَمَّ يَتَسَاءَلُونَ
वे आपस में किस चीज़ के विषय में प्रश्न कर रहे हैं?
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
عَمَّ يَتَسَاءَلُونَ
वे आपस में किस चीज़ के विषय में प्रश्न कर रहे हैं?
عَنِ النَّبَإِ الْعَظِيمِ
बहुत बड़ी सूचना के विषय में।
الَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ
जिसमें वे मतभेद करने वाले हैं।
كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
फिर हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهَادًا
क्या हमने धरती को बिछौना नहीं बनाया?
وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا
और पर्वतों को मेखें?
وَخَلَقْنَاكُمْ أَزْوَاجًا
तथा हमने तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।
وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا
तथा हमने तुम्हारी नींद को आराम (का साधन) बनाया।
وَجَعَلْنَا اللَّيْلَ لِبَاسًا
और हमने रात को आवरण बनाया।
وَجَعَلْنَا النَّهَارَ مَعَاشًا
और हमने दिन को कमाने के लिए बनाया।
وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا
तथा हमने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आकाश) बनाए।
وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا
और हमने एक प्रकाशमान् तप्त दीप (सूर्य) बनाया।
وَأَنْزَلْنَا مِنَ الْمُعْصِرَاتِ مَاءً ثَجَّاجًا
और हमने बदलियों से मूसलाधार पानी उतारा।
لِنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَنَبَاتًا
ताकि हम उसके द्वारा अन्न और वनस्पति उगाएँ।
وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا
और घने-घने बाग़।
إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كَانَ مِيقَاتًا
निःसंदेह निर्णय (फ़ैसले) का दिन एक नियत समय है।
يَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا
जिस दिन सूर में फूँक मारी जाएगी, तो तुम दल के दल चले आओगे।
وَفُتِحَتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ أَبْوَابًا
और आकाश खोल दिया जाएगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जाएँगे।
وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا
और पर्वत चलाए जाएँगे, तो वे मरीचिका बन जाएँगे।
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا
निःसंदेह जहन्नम घात में है।
لِلطَّاغِينَ مَآبًا
सरकशों का ठिकाना है।
لَابِثِينَ فِيهَا أَحْقَابًا
जिसमें वे अनगिनत वर्षों तक रहेंगे।
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا
वे उसमें न कोई ठंड चखेंगे और न पीने की चीज़।
إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا
सिवाय अत्यंत गर्म पानी और बहती पीप के।
جَزَاءً وِفَاقًا
यह पूरा-पूरा बदला है।
إِنَّهُمْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ حِسَابًا
निःसंदेह वे हिसाब से नहीं डरते थे।
وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كِذَّابًا
तथा उन्होंने हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया।
وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ كِتَابًا
और हमने हर चीज़ को लिखकर संरक्षित कर रखा है।
فَذُوقُوا فَلَنْ نَزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا
तो चखो, हम तुम्हारे लिए यातना ही अधिक करते रहेंगे।
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا
निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सफलता है।
حَدَائِقَ وَأَعْنَابًا
बाग़ तथा अंगूर।
وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا
और समान उम्र वाली नवयुवतियाँ।
وَكَأْسًا دِهَاقًا
और छलकते हुए प्याले।
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।
جَزَاءً مِنْ رَبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا
यह तुम्हारे पालनहार की ओर से बदले में ऐसा प्रदान है जो पर्याप्त होगा।
رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا
जो आकाशों और धरती तथा उनके बीच की हर चीज़ का पालनहार है, अत्यंत दयावान् है। उससे बात करने का उन्हें अधिकार नहीं होगा।
يَوْمَ يَقُومُ الرُّوحُ وَالْمَلَائِكَةُ صَفًّا ۖ لَا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًا
जिस दिन रूह़ (जिबरील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, उससे केवल वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और वह ठीक बात कहेगा।
ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الْحَقُّ ۖ فَمَنْ شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ مَآبًا
यही (वह) दिन है जो सत्य है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर लौटने की जगह (ठिकाना) बना ले।
إِنَّا أَنْذَرْنَاكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنْظُرُ الْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ الْكَافِرُ يَا لَيْتَنِي كُنْتُ تُرَابًا
निःसंदेह हमने तुम्हें एक निकट ही आने वाली यातना से डरा दिया है, जिस दिन मनुष्य देख लेगा, जो कुछ उसके दोनों हाथों ने आगे भेजा है, और काफिर कहेगा : ऐ काश कि मैं मिट्टी होता!